बलिया में गंगा तीसरी बार उफान पर:सड़कों पर हो रहा अंतिम संस्कार; 70 हजार लोग प्रभावित

Aug 29, 2025 - 09:00
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बलिया में गंगा तीसरी बार उफान पर:सड़कों पर हो रहा अंतिम संस्कार; 70 हजार लोग प्रभावित
बलिया में गंगा नदी तीसरी बार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी के उफान ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगा किनारे अंतिम संस्कार की जगह अब लोग सड़कों पर शवदाह करने को मजबूर हैं। बैरिया तहसील के नौरंगा चक्की गांव में बुधवार को गंगा ने 10 घरों को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पहली बार नदी का ऐसा रौद्र रूप देखा है। इस गांव तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता नदी किनारे से होकर जाता है। गंगा के बढ़े जलस्तर से जिले की करीब 70 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। अब तक करीब 70 पक्के-कच्चे मकान नदी में समा चुके हैं। सदर तहसील के महावीर घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निर्माणाधीन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के पास सड़क पर ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बाढ़ का पानी निहोरा नगर, महावीर घाट, कृष्णा नगर, बेदुआ, गायत्री कालोनी और मुहम्मदपुर में घुस गया है। सड़कें जलमग्न हैं, जिससे लोगों का आवागमन बाधित है। हालांकि सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर घट रहा है और गंगा में भी कुछ कमी आई है, लेकिन दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पहले दो विजुअल देखिए बलिया में गंगा नदी तीसरी बार अपना रौद्र रूप धारण करते हुए खतरा निशान से ऊपर बहाव कर रही है। ऐसे में गंगा नदी के किनारे न जाकर बल्कि सड़क किनारे ही लोग दाह संस्कार करने पर मजबूर हो गए हैं। बता दें कि सदर तहसील के दक्षिणी छोर से गंगा नदी निकलते हुए बैरिया तहसील क्षेत्र के माझी पहुंचकर सरयू नदी में विलीन हो जाती है।वजह कि बलिया के उत्तरी छोर से बेल्थरा रोड, सिकंदरपुर,बांसडीह तहसील क्षेत्र होकर सरयू नदी माझी पहुंच जाती है। खतरा बिन्दु के ऊपर बह रही गंगा नदी में बढ़ाव जारी बलिया में दोनों नदियां बढ़ाव पर रहीं हालांकि सरयू (घाघरा)नदी का जलस्तर घटाव पर है ,लेकिन गंगा नदी के जलस्तर में भी बढ़ाव बताया जा रहा है।लेकिन खतरा बिंदु की बात करें तो नदियां अभी खतरा निशान के ऊपर बहाव में हैं।गंगा नदी ने ऐसा तांडव किया कि बुधवार को बैरिया तहसील अंतर्गत नौरंगा चक्की गांव के दस घर नदी में समाहित हो गए। ग्रामीण काफी परेशान रहे। बचपन से बुढ़ापा आ गया, ऐसा दृष्य सामने नहीं आया था ग्रामीणों का कहना है कि बचपन से बुढ़ापा आ गया,ऐसा दृश्य कभी सामने नहीं आया था।नदी ने उग्र रूप ले लिया है।सब से आश्चर्य की बात यह है कि नौरंगा चक्की गांव में नदी के सहारे ही कोई जा सकता है,इसके अलावा रास्ता नहीं है।गंगा नदी की वजह से अब तक लगभग 70 हजार की आबादी बाढ़ प्रभावित है,पक्का,कच्चा मकान की बात करें तो 70 मकानों को गंगा नदी ने निगल लिया है। बाढ़ की वजह से दास संस्कार पर भी संकट सदर तहसील अंतर्गत महावीर घाट पर सैकड़ों शव आते है,किंतु गंगा जलस्तर में वृद्धि के कारण गंगा किनारे दाह संस्कार पर संकट खड़ा हो गया है।निर्माणाधीन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के पास सड़क पर ही लोग दाह संस्कार कर रहे है।सिकंदरपुर निवासी टून टून राजभर का कहना है कि सिकंदरपुर क्षेत्र सरयू नदी के किनारे पड़ता है,उधर ज्यादा पानी होने के चलते हम लोग गंगा नदी किनारे दाह संस्कार करने आए।परन्तु यहां चारों तरफ पानी ही पानी है, कम जगह में शव जलाकर हम जा रहे हैं। शहर के निचले इलाके हुए जलमग्न गंगा नदी में उफान होने के कारण निहोरा नगर,महावीर घाट,कृष्णा नगर,बेदुआ,गायत्री कालोनी,मुहम्मदपुर आदि जगहों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।सड़कें जलमग्न हो गयी हैं।जिसकी वजह लोगों को आवागमन करने व रहने में घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के गांवों में भी घुसा बाढ़ का पानी बलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। गंगा नदी की भयावहता देख तटवर्ती इलाके लोगों की नींदे उड़ गई है। दुबे छपरा,गोपालपुर,उदई छपरा,केहरपुर,चक्की नौरंगा आदि गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। जिससे लोगों को घर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ और तस्वीरों में देखें गंगा की बाढ़

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